STF Team पर गोलियां बरसाने वाले दोषी को पांच साल की जेल, 9 साल बाद मिला खाकी को न्याय
नाहरपुर रूपा की वह खौफनाक वारदात? यह मामला 14 जनवरी 2016 का है। हिसार एसटीएफ (STF) की टीम एक गंभीर मामले की तफ्तीश करते हुए गुरुग्राम के नाहरपुर रूपा गांव पहुंची थी।

STF Team : हरियाणा के गुरुग्राम की एक स्थानीय अदालत ने कानून और सुरक्षाबलों को चुनौती देने वाले अपराधियों के लिए एक कड़ा संदेश जारी किया है। एडिशनल सेशन जज सौरभ गुप्ता की अदालत ने पुलिस बल पर जानलेवा हमला करने और सरकारी कार्य में बाधा डालने के मामले में सुदर्शन नामक व्यक्ति को 5 साल के कठोर कारावास (Rigid Imprisonment) की सजा सुनाई है।
वर्दी पर हमला पड़ा भारी: ₹50,000 का जुर्माना भी लगा
अदालत ने केवल जेल ही नहीं, बल्कि दोषी पर विभिन्न धाराओं के तहत कुल 50 हजार रुपये का आर्थिक दंड भी लगाया है। शनिवार को फैसला सुनाते हुए न्यायाधीश ने टिप्पणी की कि समाज में कानून का शासन बनाए रखने के लिए पुलिस पर हमला करने वालों के साथ किसी भी प्रकार की नरमी नहीं बरती जा सकती।

नाहरपुर रूपा की वह खौफनाक वारदात? यह मामला 14 जनवरी 2016 का है। हिसार एसटीएफ (STF) की टीम एक गंभीर मामले की तफ्तीश करते हुए गुरुग्राम के नाहरपुर रूपा गांव पहुंची थी। जैसे ही टीम ने संदिग्ध ठिकाने की घेराबंदी की, वहां मौजूद अपराधियों ने खुद को घिरता देख पुलिस पर अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी।
धमकी: आरोपियों ने चिल्लाते हुए पुलिसकर्मियों को ‘गोलियों से भून देने’ की धमकी दी।
जवाबी कार्रवाई: विपरीत परिस्थितियों में भी एसटीएफ के जवानों ने साहस दिखाया और जवाबी कार्रवाई करते हुए सुदर्शन को अवैध हथियार के साथ रंगे हाथों दबोच लिया।
लंबी कानूनी प्रक्रिया और पुलिस द्वारा पेश किए गए पुख्ता सबूतों के आधार पर कोर्ट ने दोषी को सजा सुनाई। मुख्य सजाएं इस प्रकार हैं:
IPC 307 (हत्या का प्रयास): 05 वर्ष की कठोर कैद।
IPC 353 (सरकारी कर्मचारी पर हमला): 02 वर्ष की कैद।
आर्म्स एक्ट (हथियार कानून): अवैध हथियार रखने और चलाने के लिए अलग-अलग 03-03 साल की सजा।
अदालत ने आदेश दिया है कि ये सभी सजाएं एक साथ (Concurrently) चलेंगी।
गुरुग्राम पुलिस के लिए यह जीत इसलिए भी अहम है क्योंकि 9 साल तक चली इस कानूनी लड़ाई में पुलिस ने साक्ष्यों और गवाहों को टूटने नहीं दिया। पुलिस प्रवक्ता ने बताया कि इस तरह के फैसलों से फील्ड में तैनात जवानों का मनोबल बढ़ता है और अपराधियों में कानून का भय पैदा होता है।













